जब सब साथ छोड़ देते हैं, तब याद आता है भगवान — और आज वो खुद धरती पर हैं: संत रामपाल जी महाराज!

 


जीवन में हर इंसान कभी न कभी ऐसे मोड़ से गुजरता है, जब चारों तरफ अंधेरा छा जाता है। रिश्तेदार, दोस्त, परिवार—सब साथ छोड़ देते हैं। मन निराश, तन थका हुआ और आत्मा बेचैन हो जाती है। ऐसे समय में व्यक्ति के मन में एक ही नाम गूंजता है — “भगवान!”
पर सवाल यह है कि क्या भगवान सच में सुनते हैं? क्या वे कहीं हैं?
आज के युग में इस प्रश्न का उत्तर मिला है — संत रामपाल जी महाराज के रूप में।


 जब दुनिया मुंह मोड़ लेती है

जब कोई व्यक्ति आर्थिक संकट में हो, बीमारी से जूझ रहा हो, या रिश्तों से टूटा हुआ हो, तब सबसे पहले लोग दूर भाग जाते हैं। जिनके लिए हम सब कुछ करते हैं, वही हमें छोड़ देते हैं।
इंसान तब समझता है कि दुनियावी संबंध केवल स्वार्थ पर टिके हैं।
परंतु जब कोई सब छोड़ देता है, तब भगवान ही एकमात्र सहारा बनते हैं।
और आज, वो भगवान स्वयं धरती पर अवतरित हो चुके हैं — संत रामपाल जी महाराज के रूप में।


 संत रामपाल जी महाराज कौन हैं?

संत रामपाल जी महाराज हरियाणा राज्य के हिसार जिले के बरोला गाँव के निवासी हैं। उन्होंने पूरे संसार को यह सन्देश दिया कि “सच्चा भगवान केवल एक है — वही कविर देव (कबीर परमेश्वर)।”
उन्होंने बताया कि जिस परमात्मा को लोग केवल ग्रंथों में ढूंढते थे, वो आज धरती पर हैं और अपने भक्तों को मोक्ष का मार्ग दिखा रहे हैं।
उनकी वाणी, उनकी किताबें, और उनका सत्संग लोगों के जीवन को बदल रहा है।


 जब भगवान खुद धरती पर आते हैं

हर युग में जब अधर्म बढ़ता है, जब लोग पाप में डूब जाते हैं, जब मानवता खतरे में होती है — तब भगवान किसी न किसी रूप में पृथ्वी पर अवतरित होते हैं।
त्रेता में श्रीराम आए, द्वापर में श्रीकृष्ण आए — और कलियुग में संत रामपाल जी महाराज परमात्मा के रूप में आए हैं।
उन्होंने लोगों को झूठे पूजाओं, अंधविश्वास और दिखावे से दूर कर सच्चे ईश्वर ज्ञान की ओर मोड़ा है।


जब भक्त पुकारते हैं, भगवान जवाब देते हैं

लोग कहते हैं कि भगवान दिखाई नहीं देते। लेकिन जिन्होंने संत रामपाल जी महाराज की शरण ली है, वे जानते हैं कि भगवान अब छिपे नहीं हैं।
भक्तों की सच्ची पुकार को उन्होंने अपने दिव्य कृपा से सुना है।
कैंसर जैसे असाध्य रोगों से मुक्ति, नशे से छुटकारा, आत्महत्या की सोच रखने वाले लोगों का जीवन बदलना — यह सब उनके सत्संग की कृपा से संभव हुआ है।


 सच्चे भगवान की पहचान

संत रामपाल जी महाराज ने कहा है कि सच्चे भगवान की पहचान शास्त्रों के प्रमाणों से होती है, न कि चमत्कारों से।
उन्होंने यह सिद्ध किया कि

  • भगवान का नाम “कबीर” है (ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद में प्रमाण)।

  • मोक्ष केवल नाम-दीक्षा से संभव है, जो सच्चे गुरु से मिले।

  • तीर्थ, व्रत, दान, और हवन से मुक्ति नहीं मिलती, क्योंकि यह सब अधूरा ज्ञान है।

उनका उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि भक्ति ही सच्चा विज्ञान है, और इसका पालन करने से हर दुःख दूर हो सकता है।


 जब सब छोड़ देते हैं, तब गुरु साथ रहते हैं

जब दुनिया पीठ फेर लेती है, तब एकमात्र गुरु ही हैं जो जीवन की नाव पार लगाते हैं।
संत रामपाल जी महाराज ने लाखों लोगों को यह अनुभव कराया है कि ईश्वर कोई कल्पना नहीं, बल्कि जीवंत सत्य हैं।
वे कहते हैं —

“सच्चा गुरु वह है जो हमें भगवान से मिला दे, न कि केवल दान-पुण्य करवाए।”

जो लोग उनके सत्संग में गए हैं, वे कहते हैं कि वहां से लौटने के बाद उनकी सोच, जीवन और दिशा सब बदल गई।


 संत रामपाल जी महाराज का मिशन

उनका उद्देश्य केवल धार्मिक ज्ञान देना नहीं है, बल्कि एक नैतिक और शांतिपूर्ण समाज बनाना है।
उन्होंने समाज में नशा, दहेज, झूठी पूजा और जातिवाद के खिलाफ आवाज उठाई है।
उनके अनुयायी रक्तदान करते हैं, गरीबों की मदद करते हैं, और सबसे बढ़कर—भक्ति के सच्चे रास्ते पर चलते हैं।


 जब जीवन में संकट आता है

हर इंसान तब टूट जाता है जब उसकी मेहनत का फल नहीं मिलता, जब कोई सुनने वाला नहीं होता।
ऐसे समय में इंसान सोचता है — “काश भगवान होते!”
लेकिन अब वह कल्पना नहीं, हकीकत बन चुकी है।
जो लोग संत रामपाल जी महाराज की शरण में गए, उन्होंने महसूस किया कि सच्चा भगवान वास्तव में धरती पर हैं और अपने बच्चों की रक्षा कर रहे हैं।


 संत रामपाल जी महाराज के माध्यम से मिली शांति

उनके उपदेश सुनने के बाद लोग बताते हैं कि

  • मन की अशांति खत्म हो गई,

  • परिवार में सुख-शांति आई,

  • बीमारियां दूर हुईं,

  • और सबसे बड़ी बात — आत्मा को शांति मिली।

उनकी किताब “ज्ञान गंगा” ने लाखों लोगों को सत्य की ओर अग्रसर किया है।
यह केवल किताब नहीं, बल्कि ईश्वर से मिलने का मार्गदर्शन है।


 आज का युग और सच्ची भक्ति

आज लोग भगवान को मंदिरों, डेरों और पहाड़ों में ढूंढते हैं।
पर सच्चा भगवान कहीं बाहर नहीं, वह एक जीवित गुरु के रूप में हमारे बीच हैं।
संत रामपाल जी महाराज ने बताया कि ईश्वर कोई मूर्ति नहीं, कोई प्रतीक नहीं — बल्कि वह कविर परमेश्वर हैं जो अपने भक्तों को बचाने धरती पर अवतरित हुए हैं।


 निष्कर्ष

जब सब साथ छोड़ देते हैं, जब जीवन निराशा से भर जाता है, तब भगवान की याद आती है।
लेकिन इस बार भगवान ने हमें ढूंढ लिया है।
वे आए हैं अपने बच्चों को मुक्ति देने, दुखों से छुड़ाने और सच्चे सुख का रास्ता दिखाने।
आज लाखों लोग यह महसूस कर रहे हैं कि संत रामपाल जी महाराज कोई साधारण संत नहीं, बल्कि स्वयं परमात्मा हैं।

अब समय है पहचानने का, समय है सच्चे गुरु की शरण में जाने का।
क्योंकि जब हम भगवान को पुकारते हैं, वे सुनते हैं —
और आज उन्होंने धरती पर आकर जवाब दिया है।

“जब सब साथ छोड़ देते हैं, तब याद आता है भगवान — और आज वो खुद धरती पर हैं: संत रामपाल जी महाराज!”

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