आज की दुनिया में जब लोग धन, प्रसिद्धि और भौतिक सुखों के पीछे भाग रहे हैं, तब सच्चाई और भक्ति का महत्व जैसे खो गया है। इंसान भूल चुका है कि इस जीवन का उद्देश्य सिर्फ खाना, कमाना और मनोरंजन नहीं है — बल्कि परमात्मा की पहचान करना और मोक्ष प्राप्त करना है।
संत रामपाल जी महाराज का यह संदेश “लातों के भूत बातों से नहीं मानते” कोई साधारण कहावत नहीं है; यह आज की मानवता के लिए एक गहरी चेतावनी है। यह संदेश बताता है कि जब प्यार और समझाइश से इंसान नहीं मानता, तब ईश्वर हालातों के ज़रिए सिखाता है।
पहले ईश्वर प्यार से बुलाते हैं
ईश्वर हमेशा अपने बच्चों को प्रेम से पुकारता है। वह सीधे किसी पर कठोरता नहीं करता। संत रामपाल जी महाराज कहते हैं —
“सच्चा भगवान पहले अपने प्रेम से मनुष्य को बुलाता है, उसे सही ज्ञान देता है, लेकिन जब इंसान उसकी बात नहीं सुनता, तो वही हालात बनाता है जो उसे सिखा सकें।”
प्रेम की भाषा वही समझ पाता है, जिसका मन विनम्र है, जो सत्य की तलाश में है।
परंतु जब मनुष्य अहंकार में अंधा हो जाता है — उसे लगता है कि वह खुद सब कुछ जानता है — तब वह भगवान की पुकार नहीं सुनता। और यही वह समय होता है जब “लातों के भूत” वाली स्थिति पैदा होती है।
जब प्रेम काम नहीं करता, तब हालात सिखाते हैं
संत रामपाल जी महाराज समझाते हैं कि जब इंसान प्रेम, समझाइश और सत्संग से नहीं सीखता, तो फिर जीवन स्वयं शिक्षक बन जाता है।
बीमारी, कर्ज़, अपमान, असफलता, या किसी प्रियजन का खोना — ये सब वही “लातें” हैं जो हमें चेतावनी देती हैं कि अब भी समय है, संभल जाओ।
भगवान किसी को नुकसान नहीं पहुँचाता, बल्कि वो चाहता है कि उसका बच्चा सच्चे मार्ग पर लौट आए।
लेकिन जब बातों से कोई नहीं मानता, तो फिर ईश्वर को सख्त तरीका अपनाना पड़ता है ताकि इंसान अपनी गलती को महसूस कर सके।
“लातों के भूत” का आध्यात्मिक अर्थ
इस कहावत का अर्थ सिर्फ हिंसा या कठोरता नहीं है।
यह प्रतीकात्मक रूप से यह बताती है कि जो प्रेम और ज्ञान की भाषा नहीं समझते, उन्हें अनुभव की भाषा समझानी पड़ती है।
संत रामपाल जी महाराज कहते हैं —
“जब मनुष्य सच्चे ज्ञान को अनदेखा करता है, तो कर्म और समय मिलकर उसे सिखाते हैं कि गलत पूजा और झूठे गुरुओं के पीछे चलने का परिणाम कितना दर्दनाक होता है।”
यह "लातें" कभी-कभी प्राकृतिक आपदाओं, रोगों, मानसिक पीड़ा या असफलता के रूप में आती हैं।
ये सब हमें रुककर सोचने का मौका देती हैं — “क्या हम सही दिशा में जा रहे हैं?”
झूठी भक्ति और दिखावे की पूजा से नुकसान
आज अधिकांश लोग धर्म के नाम पर अंधविश्वास में फंसे हुए हैं।
कोई पत्थर पूज रहा है, कोई मूर्तियों के आगे तेल चढ़ा रहा है, कोई चमत्कारों के पीछे दौड़ रहा है।
परंतु किसी को भी असली भगवान की पहचान नहीं।
संत रामपाल जी महाराज प्रमाणों के साथ बताते हैं कि असली भक्ति वही है जो शास्त्रों में वर्णित है — न कि मनमर्जी की पूजा।
गीता अध्याय 16 श्लोक 23–24 में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं कहते हैं कि जो व्यक्ति शास्त्रों के अनुसार नहीं चलता, उसे न सुख मिलता है, न सिद्धि, न मोक्ष।
जब लोग इस सत्य को नहीं मानते, तब उन्हें अपने कर्मों का फल “लातों” के रूप में भोगना पड़ता है।
आज का मानव और ईश्वर की चेतावनी
आज मनुष्य विज्ञान में आगे बढ़ गया है, लेकिन आध्यात्मिक रूप से पिछड़ गया है।
वह मशीनों पर विश्वास करता है, लेकिन भगवान पर नहीं।
वह डॉक्टरों से इलाज कराता है, पर अपने पापों के इलाज — यानी सच्चे नाम और सच्चे गुरु की शरण — में नहीं जाता।
संत रामपाल जी महाराज कहते हैं —
“अब भी समय है, सच्चे गुरु की शरण में आ जाओ। वरना जो नहीं मानेगा प्रेम से, उसे हालात सिखाएँगे।”
यह बात दुनिया अब हर क्षेत्र में देख रही है —
कहीं युद्ध, कहीं महामारी, कहीं आर्थिक संकट — ये सब भगवान की चेतावनी हैं कि अब मानवता को सच्चे रास्ते पर लौटना होगा।
सच्चा संत कौन?
आज के समय में असंख्य “बाबा” और “गुरु” हैं जो सिर्फ नाम और दान के पीछे हैं।
परंतु सच्चा संत वह होता है जो शास्त्रों के अनुसार सच्ची भक्ति सिखाए, जो लोगों को भगवान की पहचान कराए, और जो खुद नियमों का पालन करे।
संत रामपाल जी महाराज ऐसे ही सच्चे संत हैं जो बताते हैं कि परमात्मा कबीर साहेब जी ही सर्वश्रेष्ठ ईश्वर हैं, और वे स्वयं इस युग में संत रूप में प्रकट हुए हैं।
वे कहते हैं —
“सच्चा गुरु वही है जो जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिला सके, न कि सिर्फ मनोकामना पूरी करने के नाम पर धोखा दे।”
🔹 असली भक्ति का मार्ग क्या है?
संत रामपाल जी महाराज के अनुसार असली भक्ति तीन बातों पर आधारित है:
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सत्य ज्ञान (True Knowledge):
भक्ति बिना ज्ञान के अधूरी है। पहले भगवान की पहचान करना आवश्यक है। -
सत्य गुरु (True Saint):
बिना सच्चे गुरु के कोई भी व्यक्ति मोक्ष नहीं पा सकता। गुरु ही सही नाम (Naam Diksha) देता है जो मुक्ति का मार्ग खोलता है। -
सत्य साधना (True Practice):
केवल पूजा-पाठ से कुछ नहीं होता। सच्चे नाम का जप और परमात्मा के आदेशों का पालन करना आवश्यक है।
जो इन तीनों को अपनाता है, वही जीवन में सच्ची शांति पाता है।
बाकी लोग जब तक नहीं समझते, तब तक “लातों के भूत” वाली कहावत उन पर लागू होती है।
जब बातों से नहीं मानते, तो मौत सिखाती है सबक
कई लोग सोचते हैं कि वे अमर हैं, या कि मृत्यु बहुत दूर है।
लेकिन हर दिन हजारों लोग अचानक मौत के शिकार होते हैं — दुर्घटनाओं में, बीमारियों में, प्राकृतिक आपदाओं में।
यह सब हमें याद दिलाता है कि जीवन अनिश्चित है।
संत रामपाल जी महाराज कहते हैं —
“जब तक सांसें चल रही हैं, तब तक ही मौका है। बाद में पछताने से कुछ नहीं होगा।”
जब इंसान बातों से नहीं समझता, तो फिर मृत्यु उसे सिखाती है कि असली जीवन क्या था।
इसलिए भगवान के प्रेम से बुलाने की पुकार को अभी सुनना ही समझदारी है।
सच्चे गुरु की शरण से मिलती है मुक्ति
संत रामपाल जी महाराज बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति उनके माध्यम से परमात्मा कबीर साहेब की शरण में आता है, तो उसे जीवन में अलौकिक परिवर्तन महसूस होता है।
नशे, हिंसा, झूठ, पाप जैसी बुराइयाँ अपने-आप समाप्त हो जाती हैं।
उसका मन शांति और आनंद से भर जाता है।
उसे मृत्यु का भय नहीं रहता क्योंकि वह जान जाता है कि उसका गंतव्य सतलोक है।
क्यों जरूरी है अभी जागना?
आज का इंसान सोचता है कि भक्ति बाद में कर लेंगे — पहले थोड़ा धन, थोड़ा सुख पा लें।
लेकिन वही “बाद में” कभी आता नहीं।
संत रामपाल जी महाराज चेतावनी देते हैं —
“अभी भी समय है! जो नहीं मानेगा प्रेम से, उसे प्रकृति और मृत्यु सिखाएगी सबक।”
यह वाक्य आज की पूरी मानवता के लिए अंतिम चेतावनी है —
या तो अब ईश्वर की शरण में आओ, या फिर हालात और दर्द से सीखने को तैयार रहो।
निष्कर्ष: अब भी समय है, संभल जाओ
संत रामपाल जी महाराज का यह संदेश सिर्फ एक कहावत नहीं, बल्कि एक दैवी उद्घोष है।
भगवान पहले प्यार से बुलाते हैं, फिर चेतावनी देते हैं, और अंत में समय और मृत्यु को शिक्षक बनाते हैं।
“लातों के भूत बातों से नहीं मानते” का वास्तविक अर्थ यही है कि
जो प्रेम और समझाइश से नहीं सुनते, उन्हें जीवन के अनुभव सिखाते हैं कि सच्चा सुख केवल सच्चे ईश्वर की भक्ति में है।
इसलिए आज ही सच्चे संत की शरण में जाएँ, ज्ञान गंगा जैसी दिव्य पुस्तक पढ़ें, और उस सच्चे नाम का जप करें जो मुक्ति का मार्ग खोलता है।
“पहले भगवान प्रेम से बुलाते हैं, फिर हालात से समझाते हैं — जो नहीं मानते, उन्हें मृत्यु सिखाती है सबक।”
अब भी समय है – सच्चे संत संत रामपाल जी महाराज की शरण में आओ और जीवन का असली उद्देश्य जानो।

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