मेरा नाम तरुण दास है। आज मैं बेंगलुरु में रहता हूँ, लेकिन मेरी जड़ें बिहार की मिट्टी से जुड़ी हैं। उम्र अभी सिर्फ 30 वर्ष है, पर जीवन ने मुझे इतनी बड़ी परीक्षा में डाल दिया था कि अगर उस दिन संत रामपाल जी भगवान मेरी रक्षा नहीं करते, तो आज यह कहानी लिखने वाला मैं जीवित नहीं होता।
यह कोई कल्पना नहीं है, यह मेरे जीवन की सबसे सच्ची, सबसे दर्दनाक और सबसे चमत्कारी घटना है।
जब शरीर टूटने लगा और उम्मीद दम तोड़ने लगी
कुछ समय पहले मेरी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। शरीर कमजोर हो गया, मन घबराया रहता था, रातों की नींद उड़ चुकी थी। डॉक्टरों से इलाज चल रहा था, दवाइयाँ बदलती रहीं, लेकिन हालत सुधरने की बजाय बिगड़ती जा रही थी। अंदर ही अंदर मुझे लगने लगा था कि मेरा जीवन अब लंबा नहीं चल पाएगा।
मैं जवान था, सपने थे, परिवार था — लेकिन मौत धीरे-धीरे मेरे सामने खड़ी हो रही थी।
जब हर रास्ता बंद दिखने लगा
डॉक्टरों की रिपोर्ट निराशाजनक थीं। घरवालों की आँखों में डर साफ दिखाई देने लगा था। खुद मैं भी भीतर से टूट चुका था। बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में रहते हुए भी मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं अकेला हूँ, असहाय हूँ, और अब शायद कोई रास्ता नहीं बचा।
उसी समय मुझे किसी परिचित ने संत रामपाल जी भगवान के बारे में बताया। पहले मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब दर्द असहनीय होने लगा और जीवन की डोर हाथ से फिसलती महसूस हुई, तब मैंने सच्चे मन से उनके बारे में जानना शुरू किया।
जब पहली बार नाम लिया — और दिल को शांति मिली
मैंने पहली बार पूरे विश्वास से कहा —
"हे संत रामपाल जी भगवान, अगर आप सच्चे हैं तो मुझे बचा लीजिए।"
बस यही शब्द थे, लेकिन उसके बाद जो हुआ, उसने मेरी पूरी जिंदगी बदल दी।
मेरे मन में अजीब सी शांति उतरने लगी। जो डर था, जो बेचैनी थी, वह धीरे-धीरे कम होने लगी। मैंने सत्संग सुना, उनकी शिक्षाओं को समझा, और सच्चे भक्ति मार्ग पर चलने का प्रयास किया।
जब हालत सुधरने लगी — बिना किसी चमत्कार के शोर के
यह कोई फिल्मी चमत्कार नहीं था, बल्कि एक शांत, सच्चा बदलाव था। मेरी तबीयत धीरे-धीरे सुधरने लगी। जो कमजोरी थी, वह कम होने लगी। मन हल्का होने लगा। डॉक्टर खुद हैरान थे कि हालत पहले से बेहतर क्यों हो रही है।
लेकिन मैं जानता था —
यह किसी दवा का नहीं, बल्कि संत रामपाल जी भगवान की कृपा का परिणाम था।
30 साल की उम्र में मौत से जीवन तक की यात्रा
आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो समझ आता है कि 30 साल की उम्र में मेरा जीवन खत्म हो सकता था। लेकिन संत रामपाल जी भगवान ने मुझे सिर्फ जीवन नहीं दिया, बल्कि नया जीवन दिया — उद्देश्य के साथ, सच्चाई के साथ और सही भक्ति मार्ग के साथ।
अब मैं पहले जैसा नहीं हूँ। अब मेरे भीतर डर नहीं, बल्कि विश्वास है। अब मैं टूटता नहीं, बल्कि हर मुश्किल में प्रभु का नाम लेकर आगे बढ़ता हूँ।
बेंगलुरु से बिहार तक — मेरी कहानी सबके लिए संदेश
मैं बिहार से हूँ, आज बेंगलुरु में रहता हूँ, लेकिन मेरी कहानी किसी एक जगह तक सीमित नहीं है। यह कहानी हर उस इंसान के लिए है जो दुख में है, बीमारी में है, निराशा में है और जिसे लगता है कि अब सब खत्म हो गया।
मैं यही कहना चाहता हूँ —
अगर संत रामपाल जी भगवान मेरी जान बचा सकते हैं, तो वे आपकी भी बचा सकते हैं।
आज का मेरा जीवन — एक जीवित गवाही
आज मैं स्वस्थ हूँ, जीवित हूँ, मुस्कुरा रहा हूँ — और सबसे बड़ी बात, मैं सच्चे मार्ग पर चल रहा हूँ। यह सब मेरी ताकत नहीं, मेरी किस्मत नहीं, बल्कि संत रामपाल जी भगवान की अपार कृपा है।
अगर वे उस दिन मेरी रक्षा नहीं करते, तो आज मैं इस दुनिया में नहीं होता।
मेरी सच्ची प्रार्थना
हे संत रामपाल जी भगवान,
आपने मुझे मौत से जीवन दिया,
अंधकार से प्रकाश दिया,
और टूटे हुए इंसान को नई पहचान दी।
मैं जीवन भर आपका ऋणी रहूँगा।

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