आज की दुनिया में रोग केवल शरीर तक सीमित नहीं रह गए हैं। तनाव, भय, क्रोध, लालच और असंतुलित जीवनशैली ने इंसान को भीतर से कमजोर बना दिया है। दवाइयाँ शरीर पर काम करती हैं, लेकिन मन और आत्मा का क्या? यहीं से सच्ची भक्ति का महत्व शुरू होता है। सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि सही ज्ञान, सही आचरण और सही दिशा में जीवन जीने की कला है।
जब मन भय में होता है, तब शरीर भी कमजोर पड़ जाता है। आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि मानसिक स्थिति का सीधा असर शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। निरंतर चिंता, नकारात्मक सोच और असुरक्षा रोगों को आमंत्रण देती है। इसके विपरीत, सच्ची भक्ति मन को स्थिर करती है, भय को दूर करती है और आत्मविश्वास को जन्म देती है। जहाँ भय नहीं, वहाँ रोग टिक नहीं पाते।
संत रामपाल जी महाराज की शिक्षाओं में भक्ति को अंधविश्वास नहीं, बल्कि ज्ञान से जुड़ा मार्ग बताया गया है। सच्ची भक्ति मनुष्य को यह सिखाती है कि जीवन केवल शरीर नहीं है, बल्कि आत्मा का भी अस्तित्व है। जब इंसान अपने अस्तित्व को समझने लगता है, तब उसका दृष्टिकोण बदलता है। यही बदलाव रोगों के लिए सबसे बड़ा डर बन जाता है।
सच्ची भक्ति अनुशासन सिखाती है—सादा जीवन, संयमित आहार, नशामुक्ति, और नैतिक आचरण। ये सभी तत्व मिलकर एक ऐसा वातावरण बनाते हैं जिसमें शरीर और मन दोनों संतुलन में रहते हैं। जहाँ संयम है, वहाँ असंतुलन से पैदा होने वाले रोग स्वतः कम होने लगते हैं। इसलिए कहा जाता है कि रोग सच्ची भक्ति से डरते हैं।
एक और महत्वपूर्ण पहलू है—आशा। सच्ची भक्ति निराशा को आशा में बदल देती है। जब इंसान को यह विश्वास हो जाता है कि उसका जीवन किसी उच्च शक्ति के नियमों के अनुसार चल रहा है, तब वह अकेला महसूस नहीं करता। यह भावनात्मक सहारा रोगों से लड़ने की आंतरिक शक्ति देता है। कई बार रोग शरीर से नहीं, बल्कि टूटे हुए मन से जन्म लेते हैं।
यह कहना गलत नहीं होगा कि सच्ची भक्ति रोगों को सीधे “भगा” नहीं देती, बल्कि वह उस ज़मीन को ही खत्म कर देती है जहाँ रोग पनपते हैं। नकारात्मकता, भय और अज्ञान—इन तीनों का अंत ही सच्ची भक्ति का प्रारंभ है।
इसीलिए आज लाखों लोग इस विचार को आगे बढ़ा रहे हैं कि केवल दवा ही समाधान नहीं, बल्कि सही ज्ञान और सही भक्ति भी उतनी ही आवश्यक है। यह विषय केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि सोचने और साझा करने के लिए है—क्योंकि हर व्यक्ति को मानसिक शांति और संतुलित जीवन की आवश्यकता है।
अगर यह विचार आपको छू गया हो, तो इसे आगे साझा करें—क्योंकि सच्ची भक्ति का संदेश जितना फैलेगा, उतना ही भय और रोग कमजोर पड़ेंगे। 🙏

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