आज रथ सप्तमी पर जानिए वह भक्ति जो जन्म-मरण से छुटकारा दिलाए — Sant Rampal Ji Maharaj Ji

 


भारत की सनातन परंपरा में रथ सप्तमी का विशेष महत्व है। इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है और इसे स्वास्थ्य, ऊर्जा और शुभता का प्रतीक माना जाता है। लोग सुबह स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देते हैं, व्रत रखते हैं और पुण्य प्राप्ति की कामना करते हैं। परंतु क्या यह पूजा वास्तव में हमें जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिला सकती है?

Sant Rampal Ji Maharaj Ji बताते हैं कि सच्चा लाभ केवल परंपरागत पूजा से नहीं, बल्कि तत्वज्ञान युक्त सही भक्ति से मिलता है, जो आत्मा को स्थायी शांति और मोक्ष प्रदान करती है। आइए इस रथ सप्तमी पर जानें वह भक्ति जो जीवन की सबसे बड़ी समस्या — जन्म और मृत्यु — का स्थायी समाधान देती है।


रथ सप्तमी का आध्यात्मिक महत्व

रथ सप्तमी माघ शुक्ल सप्तमी को मनाई जाती है और इसे सूर्य के उत्तरायण गमन का प्रतीक माना जाता है। यह दिन प्रकृति में ऊर्जा के संचार और जीवन के पुनर्जागरण का संकेत देता है। लोग मानते हैं कि इस दिन सूर्य पूजा से रोग नष्ट होते हैं और सौभाग्य बढ़ता है।

लेकिन Sant Rampal Ji Maharaj Ji समझाते हैं कि:

“यदि केवल सूर्य पूजा से जन्म-मरण समाप्त हो जाता, तो आज संसार में कोई दुखी नहीं होता।”

अर्थात बाहरी पूजा कुछ सांसारिक लाभ तो दे सकती है, लेकिन आत्मा की मुक्ति के लिए पूर्ण भक्ति मार्ग आवश्यक है।


जन्म और मृत्यु — मानव जीवन की सबसे बड़ी समस्या

हर व्यक्ति जन्म लेता है, बड़ा होता है, रोगी पड़ता है और अंततः मृत्यु को प्राप्त होता है। यही चक्र बार-बार चलता रहता है। चाहे कोई अमीर हो या गरीब, ज्ञानी हो या अज्ञानी — इस नियम से कोई बच नहीं सकता।

शास्त्र बताते हैं कि यह चक्र कर्मबंधन के कारण चलता है। जब तक आत्मा अपने मूल स्थान यानी परमधाम को नहीं पहचानती, तब तक उसे बार-बार शरीर धारण करना पड़ता है।

Sant Rampal Ji Maharaj Ji बताते हैं कि:

“मनुष्य जीवन का उद्देश्य धन, पद या सुख नहीं, बल्कि जन्म-मरण से मुक्ति पाना है।”


क्या सूर्य पूजा जन्म-मरण से छुटकारा दिला सकती है?

सूर्य देव सृष्टि के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। वे प्रकाश, ऊर्जा और जीवन का आधार हैं। उनकी पूजा करना सम्मान की बात है, लेकिन वे स्वयं भी नाशवान लोक में स्थित हैं।

Sant Rampal Ji Maharaj Ji समझाते हैं कि:

“जो स्वयं काल के अधीन है, वह किसी को काल से मुक्त नहीं कर सकता।”

अर्थात सूर्य देव या किसी भी देवता की पूजा से अस्थायी लाभ मिल सकता है — स्वास्थ्य, समृद्धि या मानसिक शांति — लेकिन मोक्ष केवल उस परम सत्ता से मिलता है जो काल से परे है।


सच्ची भक्ति क्या है?

सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ, व्रत, स्नान, दीपक जलाने या मंत्र उच्चारण तक सीमित नहीं है। Sant Rampal Ji Maharaj Ji बताते हैं कि सच्ची भक्ति पाँच मूल स्तंभों पर आधारित होती है:

  1. तत्वज्ञान (पूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान)

  2. पूर्ण गुरु की शरण

  3. शास्त्रानुसार मंत्र साधना

  4. नैतिक और संयमित जीवन

  5. एक परमात्मा में पूर्ण विश्वास

जब तक भक्ति इन आधारों पर नहीं होती, तब तक आत्मा को पूर्ण लाभ नहीं मिल सकता।


शास्त्रों में जन्म-मरण से मुक्ति का मार्ग

Sant Rampal Ji Maharaj Ji अपने सत्संगों में प्रमाण सहित बताते हैं कि सभी प्रमुख धर्मग्रंथों में मोक्ष का स्पष्ट मार्ग दिया गया है।

भगवद गीता से प्रमाण

गीता अध्याय 15 श्लोक 4 में कहा गया है कि उस परम पद की खोज करनी चाहिए जहाँ जाने के बाद फिर लौटकर संसार में नहीं आना पड़ता।

यह स्पष्ट करता है कि कोई ऐसा स्थान और सत्ता है जो जन्म-मरण से परे है — और वही मोक्ष का मार्ग है।


पूर्ण गुरु की आवश्यकता क्यों?

आज संसार में अनेक साधु, संत, महात्मा और गुरु हैं, लेकिन Sant Rampal Ji Maharaj Ji बताते हैं कि:

“हर गुरु मोक्षदाता नहीं होता, जैसे हर डॉक्टर हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं होता।”

पूर्ण गुरु वही होता है:

✔ जो सभी शास्त्रों का पूर्ण ज्ञान रखता हो
✔ जो शास्त्रानुसार साधना देता हो
✔ जो परमात्मा की वास्तविक पहचान कराता हो
✔ जो जन्म-मरण से मुक्ति का मार्ग बताए

बिना पूर्ण गुरु के साधना करना ऐसा है जैसे बिना नक्शे के अनजान जंगल में यात्रा करना।


कर्मबंधन और उसका समाधान

हर व्यक्ति अपने कर्मों का फल भोगता है — अच्छे कर्म सुख देते हैं, बुरे कर्म दुख देते हैं। लेकिन अच्छे कर्म भी केवल अच्छे जन्म देते हैं, मोक्ष नहीं।

Sant Rampal Ji Maharaj Ji बताते हैं कि:

“कर्मों का हिसाब केवल सच्ची भक्ति से ही समाप्त होता है।”

जब आत्मा सही भक्ति मार्ग अपनाती है, तो पुराने पाप कर्म कटते हैं और नए कर्म बंधते नहीं — जिससे जन्म-मरण का चक्र टूट जाता है।


बाहरी पूजा बनाम आंतरिक साधना

अधिकांश लोग पूजा को बाहरी क्रियाओं तक सीमित मानते हैं — मंदिर जाना, दीप जलाना, स्नान करना, फल चढ़ाना आदि। ये सभी कार्य मन को शांत करते हैं, लेकिन आत्मा का उद्धार नहीं करते।

Sant Rampal Ji Maharaj Ji कहते हैं:

“स्नान शरीर को साफ करता है, लेकिन सच्ची भक्ति आत्मा को शुद्ध करती है।”

आंतरिक साधना यानी मंत्र जप, ध्यान और नाम सुमिरन, जब सही विधि से किया जाता है, तभी आत्मा परमात्मा से जुड़ती है।


परमात्मा कौन हैं?

Sant Rampal Ji Maharaj Ji के अनुसार, परमात्मा वही हैं जो:

✔ सृष्टि के रचयिता हैं
✔ अविनाशी हैं
✔ जन्म-मरण से परे हैं
✔ कर्मों से बंधे नहीं हैं
✔ मोक्ष देने की शक्ति रखते हैं

उन्हें वेदों में परम अक्षर ब्रह्म, गीता में परम पद और संत वाणी में सतपुरुष कहा गया है।


क्यों असफल हो जाती है अधिकांश भक्ति?

आज लाखों लोग पूजा-पाठ करते हैं, फिर भी दुख, बीमारी, तनाव और भय से मुक्त नहीं हो पाते। इसका कारण है:

✔ अपूर्ण ज्ञान
✔ गलत साधना विधि
✔ पूर्ण गुरु का अभाव
✔ कर्मबंधन की समझ न होना

Sant Rampal Ji Maharaj Ji बताते हैं कि जब तक भक्ति शास्त्रानुसार नहीं होती, तब तक उसका फल भी अधूरा रहता है।


सच्ची भक्ति का प्रभाव जीवन पर

जो लोग Sant Rampal Ji Maharaj Ji की बताई गई तत्वज्ञान आधारित भक्ति अपनाते हैं, उनके जीवन में:

  • मानसिक शांति आती है

  • नशे और बुरी आदतें छूटती हैं

  • पारिवारिक कलह कम होता है

  • जीवन में उद्देश्य और दिशा मिलती है

  • मृत्यु का भय समाप्त होता है

लेकिन सबसे बड़ा लाभ यह है कि आत्मा को मोक्ष का मार्ग मिल जाता है।


स्वर्ग भी स्थायी नहीं है

अधिकांश लोग सोचते हैं कि स्वर्ग प्राप्त करना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है। लेकिन Sant Rampal Ji Maharaj Ji बताते हैं कि:

“स्वर्ग भी नाशवान है। वहाँ का सुख समाप्त होने पर आत्मा फिर जन्म लेती है।”

अर्थात सच्चा लक्ष्य स्वर्ग नहीं, बल्कि परमधाम है — जहाँ से लौटना नहीं पड़ता।


रथ सप्तमी का वास्तविक संदेश

रथ सप्तमी केवल सूर्य पूजा का दिन नहीं, बल्कि यह हमें याद दिलाता है कि:

✔ जीवन ऊर्जा से भरा होना चाहिए
✔ आत्मा को अज्ञान से प्रकाश की ओर बढ़ना चाहिए
✔ सत्य की खोज करनी चाहिए

Sant Rampal Ji Maharaj Ji कहते हैं कि रथ सप्तमी जैसे पर्व हमें बाहरी पूजा से ऊपर उठकर सच्ची भक्ति की ओर बढ़ने का अवसर देते हैं।


क्या सच्ची भक्ति कठिन है?

नहीं। Sant Rampal Ji Maharaj Ji बताते हैं कि सच्ची भक्ति:

✔ गृहस्थ जीवन में रहकर की जा सकती है
✔ सरल मंत्रों से होती है
✔ किसी दिखावे की आवश्यकता नहीं होती
✔ प्रेम और विश्वास पर आधारित होती है

यह भक्ति किसी को संसार छोड़ने नहीं कहती, बल्कि संसार में रहते हुए सही जीवन जीना सिखाती है।


मृत्यु का भय कैसे समाप्त होता है?

अधिकांश लोग मृत्यु से डरते हैं क्योंकि उन्हें नहीं पता कि मृत्यु के बाद क्या होगा। लेकिन जब आत्मा को सही ज्ञान मिल जाता है, तब मृत्यु डरावनी नहीं रह जाती।

Sant Rampal Ji Maharaj Ji बताते हैं कि:

“जिसे अपने वास्तविक घर का पता चल जाता है, उसे यात्रा से डर नहीं लगता।”

सच्ची भक्ति आत्मा को उसके मूल स्थान — परमधाम — का मार्ग दिखाती है।


मानव जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि

धन, प्रसिद्धि, पद और सुख — ये सभी अस्थायी हैं। लेकिन यदि मनुष्य अपने जीवन में:

✔ पूर्ण गुरु को पहचान ले
✔ सही भक्ति विधि अपना ले
✔ जन्म-मरण से मुक्त हो जाए

तो इससे बड़ी कोई उपलब्धि नहीं हो सकती।


Sant Rampal Ji Maharaj Ji का करुण संदेश

Sant Rampal Ji Maharaj Ji का उद्देश्य किसी की आस्था तोड़ना नहीं, बल्कि उसे पूर्णता देना है। वे कहते हैं:

“सबका सम्मान करो, लेकिन मोक्ष केवल उस परमात्मा से मांगो जो शास्त्रों में बताया गया है।”

उनका संदेश प्रेम, करुणा, सत्य और मुक्ति पर आधारित है।


निष्कर्ष

रथ सप्तमी पर सूर्य देव की पूजा करना एक सुंदर परंपरा है, लेकिन जन्म-मरण से मुक्ति केवल उसी से संभव नहीं है। Sant Rampal Ji Maharaj Ji के अनुसार, सच्चा लाभ केवल:

✔ तत्वज्ञान
✔ पूर्ण गुरु
✔ शास्त्रानुसार भक्ति
✔ परमात्मा की सही पहचान

से ही मिलता है।

इस रथ सप्तमी पर केवल अर्घ्य देने तक सीमित न रहें, बल्कि उस भक्ति को जानें जो आत्मा को अमर बना देती है।

“अस्थायी सुख नहीं, शाश्वत आनंद चुनिए — यही सच्ची भक्ति है।”

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